31 अक्टूबर दिन गुरुवार से शुरू हो रही है ,छठ पूजा

छठ पूजा का महापर्व 31 अक्टूबर दिन गुरुवार से शुरू हो रहा है। छठ पूजा बिहार, यूपी, झारखंड, दिल्ली, मुंबई समेत कई शहरों में चार दिनों तक धूमधाम से मनाया जाएगा। इस व्रत में करीब 36 घंटों तक व्रत रखने वाले को निर्जला रहना होता है। यह व्रत सभी व्रतों में सबसे कठिन माना जाता है। इस व्रत के नियम अन्य व्रतों से भिन्न और कठिन होते हैं, जिनका पालन करना आवश्यक माना गया है। इन नियमों का पालन न करने से व्रत निष्फल माना जाता है। सूर्य देव और छठी मैया का अशीर्वाद व्रत रखने वाले व्यक्ति और उसके परिवार को नहीं मिलता है।

छठी मैया और सूर्य देव की आराधना को समर्पित छठ पूजा में नियमों का पालन करते हैं, तो व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है। नियम तोड़ने पर व्रत निष्फल हो जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, राजा सगर ने सूर्य षष्ठी व्रत नियमपूर्वक नहीं किया था, जिसके कारण उनके 60 हजार पुत्र मार दिए गए थे।

छठ पूजा के नियम

1. व्रत रखने वाले व्यक्ति को जमीन पर चटाई बिछाकर सोना चाहिए। पलंग या तखत का प्रयोग वर्जित है।

2. चार दिन चलने वाले इस व्रत में प्रत्येक दिन स्वच्छ वस्त्र पहनने का विधान है, लेकिन शर्त ये है कि वे वस्त्र सिले हुए न हों। ऐसी स्थिति में व्रत रहने वाली महिला को साड़ी और पुरुष को धोती पहनना चाहिए।

3. यदि आपके परिवार में किसी ने छठ पूजा का व्रत रखा है तो परिवार के सदस्यों को तामसिक भोजन नहीं करना चाहिए। व्रत से चार दिन तक शुद्ध शाकाहारी भोजन ही ग्रहण करना चाहिए।

4. व्रत रखने वाले व्यक्ति को पूरे चार दिनों तक मांस, मदिरा, धूम्रपान, झूठे वचन, काम, क्रोध आदि से दूर रहना चाहिए।

5. छठ पूजा का व्रत साफ सफाई से भी जुड़ा है, इसलिए घर और पूजा स्थल आदि की साफ सफाई जरूर करें।

6. छठ पूजा में बांस के सूप का प्रयोग अनिवार्य माना गया है। सूर्य उपासना के समय पूजा सामग्री को सूप में रखकर सूर्य देव को अर्पित किया जाता है।

7. सूर्यास्त से पूर्व और सूर्योदय के समय सूर्य देव को अर्घ्य देने के लिए गन्ने का प्रयोग जरूरी माना गया है।

8. भगवान सूर्य और छठी मैया को ठेकुआ और चावल के आटे के लड्डू का भोग जरूर लगाएं। यह इस पूजा का विशेष प्रसाद होता है।

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